Artificial Intelligence (AI): अदृश्य पहलू और उनके प्रभाव (भाग-2)

भाग-१ से क्रमशः—>

दया, करुणा, संवेदना और सहानुभूति जैसे मानवीय गुण कुछ दशकों में संग्रहालयों में मिलेंगे। 

“A man is known by the company he keeps“. आजकल हमारी कंपनी मोबाइल फ़ोन और टेक गैजेट्स की है। मशीनें हमारे जीवन में इस क़दर घर कर गई हैं कि हम मशीनों की तरह ही दया, करुणा, सांत्वना, सद्भावना आदि मानवीय गुणों से दूर होते जा रहे हैं। किसी का दर्द देख दूसरे का दिल न पसीजना उदासीनता है। भावनात्मक तठस्थता। यह समाज के लिए ख़तरे का पहला स्तर है। लेकिन जब किसी का दर्द दूसरा को संतोष या सुख दे, तो यह एक मानसिक बीमारी है, अग्रेंजी में Schadenfreude कहलाता है। इस बीमारी की जड़ ईर्ष्या और inferiority complex है। हर समाज में ईर्ष्या की अपनी जगह है, मान्यता है। यह मानव प्रवृत्ति का दानवीय पहलू (dark side) है। कुछ लोगों में Schadenfreude एक नशे का रूप ले लेता है। जैसे अफ़ीम। जब तक सामने वाले की दो-चार बुराइयाँ न कर लें, उनका जी नहीं भरता। किसी के साथ, चाहे वो राक्षस ही क्यों न हो, बुरे होने की ख़बर पे यदि आपके अंदर से बुरे होने के समर्थन में “अच्छा हुआ या जैसी करनी वैसी भरनी” जैसी आवाज़ निकलती है, तो आपको Schadenfreude है। अच्छा-ख़ासा संवेदनशील इंसान भी मशीनों (मोबाइल, सोशल मीडिया, AI) की सोहबत में अपनी संवेदनशीलता खोता जा रहा है। मीडिया में तमाम ख़बरें आती हैं कि दुर्घटना में घायल की मदद करने के बजाय जुटे लोग फ़ोटो और वीडियो बनाते हैं। ऐसे लोग नींद में सो रहे हैं, उन्हें जगने की ज़रूरत है। उन्हें अपने भीतर उन मानवीय मूल्यों को सहेजने की ज़रूरत है, जो अन्य जानवरों से मानवों को ऊपर उठाती हैं। 

AI ज्ञान के कुएँ में से पानी निकाल रहा है, human intelligence की बारिश के अभाव में AI सूख सकता है।

AI एक super computing मशीन है, जो बहुत तेज़ी से सूचनाओं को चुनके व्यवस्थित कर सकती है। Human Intelligence (HI) के सौजन्य से ये सूचनाएँ पहले से ही उपलब्ध हैं। एक और अहम् बात, AI केवल digitized सूचनाओं में से ही उत्तर ढूढ़ सकता है। इनकी जानकारी किसी न किसी रूप में इंटरनेट पे उपलब्ध है। यह किसी अभिलेखागार में उपलब्ध किसी फ़िज़िकल रिकॉर्ड, जो डिजिटाइज़्ड नहीं हुआ है, को नहीं सर्च कर सकता है। यह कोई नए विषय पर शोध नहीं कर सकता है। इस प्रकार AI के सारे कामों की का स्रोत हज़ारों सालों से बना Human Intelligence का कुआँ है। AI की ट्रेनिंग के लिए HI का प्रयोग किया होता है। सैकड़ों सालों का HI आज के AI का गुरु है। AI का इस्तेमाल HI का क्षरण कर रहा है। ऐसे में HI का अकाल पड़ जाएगा। एक ऐसी स्थिति आएगी कि HI अपनी मूल शक्तियाँ खो चुका होगा और AI saturate हो चुका होगा। Artificial General Intelligence (AGI), यानी AI का मानवीय दिमाग़ की जटिलताओं के और क़रीब आने का प्रयास। यदि बच्चा रोता है, तो माँ को पता चल जाता है कि बच्चे को भूख लगी है, गोद आना चाहता है, बाहर घूमने जाना चाहता है, या उसे कहीं दर्द है। माँ अपनी judgment के हिसाब से बच्चे की ज़रूरत को पूरा करती है। AI में यह जजमेंट अभी विकसित नहीं हुआ है। एक Advance रोबोट माँ के कहने पर इनमें से किसी एक काम को कर सकता है। यदि माँ कहे कि बच्चे को बाहर घुमा कर लाओ, तो रोबोट इसको आदेश को बखूबी अंजाम दे सकता है। लेकिन बच्चे को चुप कराने के लिए करना क्या है, इसका निर्णय नहीं ले सकता। इस प्रकार के judgments को AGI में विकसित किए जाने पर काम हो रहा है। मशीनें अपने आप नए-नए कौशल सीख जाएँगी। यदि ऐसा होता है, तो मशीनें मानव पे राज करेंगी।

AI वैचारिक विविधता को समाप्त कर देगा। 

कंपनियों में उपयोग में लाए जाने वाला AI अब स्कूलों में भी पहुँच चुका है। दलील वही है: इसे बतौर सेवक (assitant) इस्तेमाल किया जाए। बच्चे समय सीमा के दबाव में assignment किसी assitant से करवा लेते हैं। नतीजा: सारी क्लास का asssigment एक जैसा। क्योंकि assignment के लिए prompt सबका एक था, और मान लें कि पूरी क्लास ने एक ही AI उपयोग किया हो। AI के किए assignment को नकल मारने (plagiarism) के दर्जे की अनुशासनहीनता में रखा गया है। यह एक छोटे साइज़ का उदाहरण है। इस क्लास को बड़ा करिए। स्कूल, जिला, प्रदेश, देश और विश्व स्तर पर सोचिए। एक विषय पर निबन्ध लिखने को दिया गया, पूरे विश्व ने एकमत लिख दिया। स्कूल स्तर पर AI को लेके नियम-क़ानून भी बन रहे हैं। जब वयस्क AI की चमक और सजावट से बच नहीं सकते, तो बच्चों का क्या दोष!  इस प्रकार सभी लोग एक ही जैसा लिखने-पढ़ने लगेंगे। धरती भौगोलिक रूप से तो गोलाकार रहेगी, परन्तु वैचारिक रूप से सपाट हो जाएगी। यह लोकतंत्र के लिए भी ख़तरा है। Netflix की documentary “The Social Dilemma” में सोशल मीडिया से लोकतंत्र को जो ख़तरा बताया गया है, AI उस ख़तरे को कई गुना करता है।


यह लेख क्यों? 

इन पहलुओं को आपके सामने लाने का मक़सद Technology का विरोध या आलोचना करना नहीं है। कुछ साल पहले दाँत उखड़वाने गया था। डॉक्टर साहब ने Pain Killer लिखा और कड़ी हिदायत दी कि दर्द अधिक होने पर ही सेवन करना है। उस दवा को देने से पहले एक साइन भी करवाया। साइन क्यों? बताया कि pain killer में अफ़ीम है। इसकी लत लग सकती है, इसलिए सजग रहिएगा। बाद में मत कहिएगा कि नहीं बताया। इस लेख का मक़सद कुछ ऐसा ही है। AI के साइड इफ़ेक्ट्स बताना, जो अक्सर महीन अक्षरों में नज़रंदाज़ हो जाते हैं। उनको आपके सामने मोटे अक्षरों में प्रस्तुति ही मेरा प्रयास है।

सादर 

-काशी की क़लम 

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