मातृभाषा की एक परिभाषा



 सादर प्रणाम!

जिस भाषा में आप बोलना शुरू करते हैं,

जिस भाषा में आप आप होते हैं,

जिस भाषा में आपको कोई फ़िल्टर लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ती,

जिस भाषा में आप मुस्कुराने से लेके हुँकारने तक का काम कर सकते हैं,

जिस भाषा में आपके भाव बिन प्रयास बहें

जिस भाषा को सीखने में आपको कम मेहनत करनी पड़े,

और सबसे महत्त्वपूर्ण बात, 

जिस भाषा को अंतिम साँस में भी बोला जा सके,

वह आपकी मातृभाषा है।

बाक़ी सब शुरू के अंत तक अपने आपको बनाए रखने का माध्यम है।

मेरी यह सौभाग्यवश हिन्दी है।


हिन्दी दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएँ।

-काशी की क़लम

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कोरी लिस्ट (लघु कथा)

सृजन के विभिन्न चरण और उनसे उतरती हुई गीता की पेंटिंग।

प्रेमी पथ (कविता)