गुलाल भवन की संकल्पना


गुलाल भवन की संकल्पना:

देवी-देवताओं-पूर्वजों के वर मिले,

सुजानों के स्नेहिल कर्मठ कर मिले।

अवनी ने दिए अंक, अम्बर ने दिए पंख,

बीच में सुनहरे सपनों के बज रहे शंख।

परहित की मड़ई में बसें हृदय विशाल,

आपके वरद हस्त तले रहे भवन गुलाल।

-काशी की क़लम 



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